गंगौर महोत्सव

गंगौर महोत्सव




गंगौर महोत्सव सबसे रंगीन बिरंगा और राजस्थान के लोगों के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है। यह त्यौहार भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती को समर्पित है। “गन” भगवान शिव के लिए है और “गौर” देवी गौरी के लिए है वह त्यौहार हिंदू कैलेंडर महीने “चैत्र” के पहले दिन शुरू होता है। नवविवाहित लड़कियाँ 18 दिन तक वर्त रखती है जिसे पूजा की पूरी प्रक्रिया माना जाता है और   एक समय भोजन करती हैं। कई अविवाहित लड़कियाँ भी अपने जीवन में अच्छे पति को पाने के लिए उपवास रखती है। महिलाएं अपने हाथों और पैरों पर महेंदी लगाती हैं और घेवर जैसी स्वादिष्ट मिठाईयाँ बनाती हैं। साथ ही अपने दोस्तों और रिश्तेदारों में वितरित करती हैं। घेवर राजस्थान की मिठाई है जो मित्रों और रिश्तेदारों में बाँटी जाती है।


गंगौर जीवन साथी चुनने का वर्ष का सबसे अच्छा समय माना जाता है। विभिन्न स्थानों से आये पुरुषों और महिलाओं को एक दूसरे से मिलने और बातचीत करने का अवसर मिलता है। कई अपना साथी चुनकर शादी भी कर लेते हैं। गंगौर सर्दियों के अंत में और वसंत की शुरूआत में होली के आसपास पूरे राजस्थान में मनाया जाता है। गंगौर का विशाल आयोजन जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर और नाथद्वारा में किया जाता है। उदयपुर में, गंगौर मेवाड़ महोत्सव  के जैसा है।


इस त्यौहार के अंतिम दिन, गौरी की छवि के साथ एक जुलूस, शहर के पैलेस के ज़ानानी-देवोधी से शुरू होता है। यह जुलूस फिर त्रिपोलिया बाजार, छोटे चौपाड़, गंगौरी बाज़ार, चौग्न स्टेडियम से गुजरता है और आखिर में तालकटोरा के निकट पहुँता है